पीतल की टोकनी,गिलास और पुराने बर्तनों देखकर खुश हुए मेहमान प्रतापगढ फार्म के दौर पर आए विदेशी मेहमान हरियाणवी सभ्यता के प्रतीक पुराने बर्तनों जैसे पीतल की टोकनी,गिलास,थाली,कटोरी,चम्मच सहित अनेक बर्तनों की धरोहर को देखकर बेहद खुश नजर आए। मेहमानों ने बर्तनों को उठाकर देखा और हरियाणवी संस्कृति की जमकर तारीफ की। विदेशी डेलिगेशन में शामिल कई देशों के प्रतिनिधियों से हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देने वाले पुराने दामन,कुर्ता,घाघरी,जूती सहित अनेक परिधानों को भी पारखी नजर से देखा। विदेशी महिलाओं ने बाजरा की खिचड़ी,पीढी और चारपाई भराई और कटपूतली का आनंद लिया। इसके पश्चात गेहूं की सफाई,दूध बिलोने,हल चलाना,कू एं से पानी भी खींचा।
देसी गाय और मुर्राह नस्ल की भैंस रही आकर्षण का केंद्र जी-20 डेलिगेशन के रूप में प्रतापगढ फार्म का दौरा करने आए विदेशी मेहमानों ने यहां देसी नस्ल की गाय और साहीवाल तथा मुर्राह नस्ल को बढावा देने की सरकार की पहल की सराहना की। फार्म पर मेहमानों ने देसी गाय और साहिवाल नस्ल की गाय को अपने हाथों से गुड़ और रोटी खिलाई। इतना ही नहीं परिसर में मुर्राह नस्ल को बढ़ावा देने वाले भैंसा विराट और डॉलर की खासियत से भी रूबरू हुए।
हरियाणी गीतों पर जमकर थिरके विदेशी मेहमान प्रतापगढ फार्म पर पहुंचे विदेशी मेहमानों ने हरियाणवी संगीत का लुत्फ उठाने के साथ -साथ हरियाणवी गीतों व संगीत पर जमकर डांस किया। बेशक उन्हें गीतों की भाषा का पता ना हो,मर संगीत की धुन पर उन्होंने जमकर डांस किया। हरियाणवी संस्कृति से जुड़े गीतों पर डांस करते हुए विदेशी मेहमानों ने कलाकारों की जमकर प्रशंसा भी की।
बैलगाड़ी और ऊंटों की सवारी का लिया आनंद विदेशों में अच्छी लगजरी गाडिय़ों में सफर करने वाले विदेशी मेहमान प्रतापगढ फार्म पर आए और उन्होंने यहां सजी- धजी बैलगाड़ी सहित ऊंटों की सवारी करते हुए हरियाणवी संस्कृति की तारीफ करते हुए तालियां बजाई। उन्होंने ऊंट की सवारी करते हुए आसपास हरियाणवी संस्कृति से रूबरू होते हुए मौजूद कलाकारों की सराहना की। उन्होंने बताया कि यहां के लोगों से अच्छा व्यवहार मिला है और यह पूरा आयोजन परफेक्ट है। उन्होंने यहां मिले आतिथ्य सत्कार की भी सराहना की। विदेशी मेहमान बोले हरियाणा इज वैरी गुड , थैक्यू हरियाणा । ————-