: शिवम भारद्वाज बोले – स्वामी दयानन्द सरस्वती जी का वेदों की ओर लौटो’ का प्रमुख नारा था
बहादुरगढ़…. लाईव हरियाणा ब्यूरो चीफ जयपाल लाम्बा
दया निधि फाउंडेशन प्रदेश अध्यक्ष शिवम भारद्वाज ने महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती की जयंती पर नमन करते हुए कहा कि स्वामी जी आधुनिक भारत के चिन्तक तथा आर्य समाज के संस्थापक थे। स्वामी दयानन्द ने हमे स्वतंत्र विचारना, बोलना और कर्त्तव्यपालन करना सिखाया।
उनके बचपन का नाम ‘मूलशंकर’ था। उन्होंने वेदों के प्रचार-प्रसार के लिए मुम्बई में आर्यसमाज (श्रेष्ट जीवन पद्धति) की स्थापना की। ‘वेदों की ओर लौटो’ यह उनका ही दिया हुआ प्रमुख नारा था। उन्होंने कर्म सिद्धान्त, पुनर्जन्म तथा सन्यास को अपने दर्शन के स्तम्भ बनाये। युवा समाजसेवी शिवम भारद्वाज ने कहा कि स्वामी जी ने आर्य समाज की स्थापना की थी वे आधुनिक भारत के महान चिन्तक रहे हैं, उनके काम और समर्पण को याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानन्द का समाज सुधार में व्यापक योगदान रहा। महर्षि दयानन्द ने तत्कालीन समाज में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों तथा अन्धविश्वासों और रूढियों-बुराइयों व पाखण्डों का खण्डन व विरोध किया। उनके ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश में समाज को आध्यात्म और आस्तिकता से परिचित कराया। वे योगी थे तथा प्राणायाम पर उनका विशेष बल था। वे सामाजिक पुनर्गठन में सभी वर्णों तथा स्त्रियों की भागीदारी के पक्षधर थे। शिवम भारद्वाज ने कहा कि उनमें न केवल देशभक्ति की भावना दिखाई देती थी बल्कि वह तो 1857 के स्वतंत्रा संग्राम में भाग लेने वाले अग्रिम लोगो में थे।