HCS पेपर लीक मामला:हाईकोर्ट ने जल्द सुनवाई करने के दिए आदेश; पूर्व रजिस्ट्रार रिक्रूटमेंट के खिलाफ विभागीय कार्यवाही पर रोक लगाने से मना*
हरियाणा सिविल सर्विसिस (HCS) ज्यूडीशियल ब्रांच के पेपर लीक मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ स्थित ट्रायल कोर्ट को जल्द सुनवाई पूरी करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार रिक्रूटमेंट एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज मामले में आरोपी बलविंदर कुमार शर्मा द्वारा विभागीय कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
जस्टिस जसवंत सिंह और जस्टिस संत प्रकाश की खंडपीठ ने फैसले में कहा कि किसी भी विभाग से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह आपराधिक मामले में सुनवाई अथवा ट्रायल पूरा होने का इंतजार करता रहे। खंडपीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में आरोपी बलविंदर कुमार शर्मा एक ज्यूडीशियल ऑफिसर की शान बरकरार रखने में पूरी तरह से असफल रहे।शर्मा पर पेपर लीक करने के एवज में आरोपी सुनीता के साथ रिश्ता बनाने का आरोप है। इस अनैतिक व्यवहार की क्रिमिनल कोर्ट सजा नहीं दे सकती।
ऐसे में द गवर्नमेंट इम्प्लाॅइज कंडक्ट रूल्स 1966 के तहत अनैतिक व्यवहार करने पर विभागीय कार्रवाई ही की जा सकती है। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि कोई भी विभाग अपने कर्मचारी को सस्पेंड करने के बाद उस पर विभागीय कार्रवाई करता है और फैसला लेता है कि उसे नौकरी में रखा जाए या नहीं। सस्पेंशन अवधि के दौरान विभाग कर्मचारी को भुगतान करता है। ऐसे में कोई भी विभाग सस्पेंशन का लाभ कर्मचारी को देकर भुगतान क्यों करता रहे, जबकि विभागीय कार्रवाई कर फैसला लिया जा सकता है।
ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होने पर विभागीय कार्रवाई जारी
हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में यह सवाल उठाया गया है कि ट्रायल कोर्ट में आरोप तय हो चुके हैं, ऐसे में विभागीय कार्यवाही पर रोक लगाई जाए। खंडपीठ ने कहा कि इस पर फैसला लेने के लिए कोई स्ट्रेट जैकेट फाॅर्मूला नहीं है। यह केस के तथ्यों पर निर्भर करता है कि विभागीय कार्रवाई पर रोक लगाई जाए या नहीं।
यह है मामला
20 मार्च 2017 को विज्ञापन देकर 109 HCS ज्यूडिशियल पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे। 16 जुलाई 2017 को लिखित परीक्षा का आयोजन किया गया था। इसके बाद रिजल्ट घोषित किया जाना बाकी था। इसी दौरान पेपर लीक का मामला सामने आया। हाईकोर्ट ने इसके बाद पेपर स्क्रैप कर दिया था। उस समय हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार रिक्रूटमेंट बलविंदर कुमार शर्मा पर आरोप लगा कि उसने आरोपी सुनीता को पेपर लीक किया। सुनीता इस परीक्षा में टॉपर थी। आरोप है कि सुनीता ने आगे डेढ़ करोड़ रुपए में अन्य आरोपियों की मदद से पेपर लीक किया।