*सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग ने आयोजित करवाई सांस्कृतिक संध्या में गूंजा शास्त्रीय संगीत*
*- संगीतमय शाम: नव स्वर रागनी वाद्य यंत्र से निकली शास्त्रीय संगीत की मधुर धुनों में खोए श्रोता*
*- नव स्वर रागनी वाद्य यंत्र से तीन धुन निकली एक साथ तो संगीतमय हुआ माहौल*
*- संगीत संध्या में विश्व विख्यात कलाकार पंडित सुभाष घोष ने बांधा समा, शास्त्रीय संगीत में सराबोर हुए श्रोता*
*झज्जर, 1 मार्च। लाईव हरियाणा ब्यूरो चीफ जयपाल लाम्बा
* सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग, हरियाणा के तत्वाधान में जिले के संस्कारम स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में शुक्रवार संगीत संध्या में सुर व ताल का ऐसा संगम हुआ कि सभागार में लोग भारतीय शास्त्रीय संगीत की मधुर धुनों में सराबोर हो गए। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला परिषद की सीईओ डा. सुभिता ढाका ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत की धुनों को सुनकर अलग ही आनंद का अनुभव हुआ और यह संगीतमय शाम उन्हें ताउम्र याद रहेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने अमृत महोत्सव की श्रृंखला के तहत भारतीय संस्कृति को प्रदेशभर में जन-जन तक पहुंचाने के लिए ऐसी सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करवाकर शानदार कार्य किया है। इस बीच कार्यक्रम में पहुंचने पर संस्कारम संस्थान के चेयरमैन डा. महिपाल यादव द्वारा सीईओ जिला परिषद डा. सुभिता ढाका व अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम के दौरान विश्व प्रसिद्ध कलाकार पंडित सुभाष चंद्र घोष ने शास्त्रीय संगीत की एक के बाद एक शानदार प्रस्तुतियां दी। भारतीय शास्त्रीय संगीत का महत्व विश्व भर में हैं और इस प्रकार के आयोजन से शास्त्रीय संगीत की आमजन तक पहुंच संभव हुई हैं साथ ही मनोरंजन की यह विधा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ रही है । पंडित सुभाष चंद्र घोष ने शुरूआत में पायो-जी-मैंने-राम-रतन-धन-पाया गीत की धुन से कार्यक्रम का आगाज किया व इसके बाद कई भजनों की धुनों की प्रस्तुति पेश की। शास्त्रीय संगीत की धुनों को सुनकर सभागार में मौजूद लोगों ने कहा कि यह शानदार संध्या की यादें उम्र भर याद रहेंगी।
जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि जनसंपर्क विभाग द्वारा संगीत संध्या जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करवाया जा रहा है। विभाग की सोच है कि इस प्रकार के कार्यक्रम संस्कृति को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान संस्थान के चेयरमैन सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया।
*नव स्वर रागनी विश्व का पहला वाद्य यंत्र*
पंडित सुभाष घोष ने मंच से बताया कि उन्होंने सालों की मेहनत के बाद नव स्वर रागनी वाद्य यंत्र बनाया है जो तीन धुनों को एक साथ निकालता है। इस वाद्य यंत्र को बनाने में करीब छह साल का समय लगा। वाद्य यंत्र एक लकड़ी पर बना हुआ है जिससे शास्त्रीय संगीत, गायकी अंग व पाश्चात्य संगीत की धुनें निकलती हैं। उन्होंने बताया कि यह यंत्र विश्व में एक है।
*जिला का नाम रौशन करने वाले कलाकार हुए सम्मानित*
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कलाकारों को सीईओ जिला परिषद डा. सुभिता ढाका ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर जोगिंद्र कुंडू, दीपक कपूर, रामबीर आर्यन, महेंद्र कादयान, सत्ते रईया, मंजीत बदलिया सहित अन्य कलाकारों को सम्मानित किया गया।