आडवाणी को भारत रत्न- जब आडवाणी ने एम डी यू रोहतक में डॉक्ट्रेट की ऑनरेरी डिग्री लेने से मना कर दिया था l आडवाणी को राम रथ यात्रा के लिए जाना जाता है l उनकी महानता का एक. किस्सा याद आया l. आडवाणी ग्रह मंत्री थे और एम डी यू रोहतक के वाइस चांसलर जनाब कौशिक साहिब ने उन्हे यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करने के लिए आमंत्रित किया था l यह लेखक तब रोहतक में जनसत्ता अखबार का रिपोर्टर था और उस समारोह में मौजूद था l अपनी स्पीच में आडवाणी साहिब ने रहस्योद्घाटन किया की वाइस चांसलर कौशिक ने उन्हें डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि देने का प्रस्ताव रखा था l उन्होंने यह कह कर मना किया की यह सम्मान मुझे नहीं लेकिन मेरे पद को दिया जा रहा है l जब में मंत्री नहीं हू तब देना तो ले लूंगा l वाकाई वे महान थे l दुमछला l यह डिग्री तो पद को मिलती है l यानि मुंह देख टीका होता है l अब इसी यूनिवर्सिटी ने एक ऐसे सज्जन को मीडिया की महान हस्ती की डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि दे दी जबकि उस सज्जन का मीडिया की हस्ती होना तो दूर वो एवरेज भी नहीं थी लेकिन वे सी एम के मुंह लगते थे l अब अगर मुझ पर यह आरोप नहीं लगे कि में अपना दुखड़ा रो रहा हूं तो बता दू कि अपन को मानद उपाधि तो दूर की बात यूनिवर्सिटी पत्रकारिता विभाग में लेक्चर के लिए भी नहीं बुलाती की कहीं सूबे के मुखिया नाराज न हो जाए l जबकि अपन हरियाणा में पांच दशक से खोजी पत्रकारिता कर रहे हैं और खोजी पत्रकारिता क्यों और कैसे सहित हरियाणा की राजनीति संस्कृति और गवर्नेंस पर किताब लिख चुके है जिनकी प्रशंशा कपिल देव , खुशवंत सिंह,कुलदीप नैयर ,प्रभाष जोशी और न्यायमूर्ति पी बी सावंत ने भी की है l बकौल शायर कुछ तो मजबूरियां रही होंगी यूहीं तो कोई बेवफा नहीं होता l अपन के लिए तो पाठको का प्यार सबसे बड़ी डिग्री है l हा अगर में अपनी आत्मा बेच कलम से समझौता कर लू तो यह यूनिवर्सिटी तो क्या सूबे की हर यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर अपन को मानद उपाधि देने के लिए पलक बिछा देगा l