पोक्सो एक्ट, मध्यस्थता अधिनियम और किशोर न्याय एक्ट के बारे में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

भिवानी, 22 मार्च। लाईव हरियाणा ब्यूरो चीफ जयपाल लाम्बा

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के चेयरमैन तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपक अग्रवाल के निर्देशानुसार एवं प्राधिकरण के सीजेएम-कम-सचिव कपिल राठी की अध्यक्षता में मध्यस्थों, पैनल अधिवक्ताओं और पैरा लीगल वॉलिंटियर्स के लिए किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम व पास्को अधिनियम और मध्यस्थता अधिनियम, 2023 के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्यस्थता पैनल अधिवक्ता शीला तंवर ने बताया कि विवाद में पक्षों के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) तंत्र के रूप में हमेशा उपलब्ध रही है। मध्यस्थता एक ऐसे तंत्र के रूप में भी सामने आती है जिसे विवादकर्ताओं की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकता है, जो विवाद समाधान के लिए अत्यधिक लचीली और अनुकूलनीय प्रक्रिया की पेशकश करता है। इसलिए मध्यस्थता अधिनियम, 2023 को उद्योग और कानूनी बिरादरी द्वारा प्रगतिशील के रूप में देखा जाता है। मध्यस्थता प्रक्रिया का संस्थागतकरण और आगामी समझौतों को लागू करना इस अधिनियम को हमारे जैसे मुकदमेबाजी वाले देश के लिए एक बहुप्रतीक्षित विकास बनाता है।
प्राधिकरण के पैनल अधिवक्ता विनोद कुमार ने पॉस्को अधिनियम ओर किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम है, बाल यौन-शोषण, यौन उत्पीड़न एवं पोर्नोग्राफी के विरुद्ध कार्यवाही के लिए कड़े प्रावधान किए गए है। यदि बच्चे द्वारा कोई गैर क़ानूनी या समाज विरोधी कार्य हो जाता है, तो इस गैर क़ानूनी कार्य को बाल अपराध कहा जाता है। कानूनी प्रक्रिया के तहत बाल अपराध 8 वर्ष से अधिक तथा 16 वर्ष से कम आयु के बालक द्वारा किया गया अपराध गैर कानूनी होगा, जिसे कानूनी प्रक्रिया के तहत बाल न्यायालय के समक्ष उपस्थित करते है। उन्होंने बताया कि विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, गंभीर अपराधों में लिप्त पाए जाने वाले बाल अपराधियों को जेल की सजा दी जा सकती है जबकि उन्हें उम्र कैद या फांसी की सजा नहीं होगी।